...संग्रह की कविताओं में समर्पण की भावना तो किसी-ना-किसी रूप में हर जगह व्याप्त है और अत्यंत ही प्रभावशाली शब्दों में व्यक्त है। हर कवि की अपनी अलग शैली होती है और यही उस कवि की पहचान भी होती है। एक अच्छी कविता की शैली स्पष्ट भावपूर्ण और आकर्षक होनी चाहिए जिसमें प्रवाह लय और उपयुक्त शब्दों का प्रयोग हो साथ ही संवेदना और चित्रात्मकता भी झलके। अरुण की कविताएँ इन कसौटियों पर खरी उतरती हैं। साथ ही उन्होंने प्रतीकों और बिंबों का भी अच्छा उपयोग किया है। अरुण की कविताओं में सहज शब्दों के अतिरिक्त संस्कृतनिष्ठ शब्दों का भी प्रचुरता से प्रयोग किया गया है। किन्तु यह प्रयोग कविता को दुरूह नहीं बनाता है बल्कि एक भावप्रवणता का सहज प्रवाह ही प्रसारित करता है । हम सभी जानते हैं कि कविता व्यक्तिगत भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का माध्यम है किन्तु यह वैयक्तिकता तब निर्वैयक्तिक हो जाती है जब कवि की प्रस्तुति से पाठक स्वयं को आबद्ध कर लेता है - यह गुण अरुण की रचनाओं में सर्वत्र नज़र आता है। ---डॉ- श्वेता दीप्ति