डिग्री के मामले में लेखक श्याम यादव मैट्रिक की परीक्षा फर्स्ट डिवीज़न से पास हैं। आगे की पढ़ाई परिस्थितिवश पूरी न हो पाई परन्तु पढ़ाई में अब्बल न होने के कारण खासकर लेखन में इनकी रूचि शुरू से ही रही थी। लिखने का शौक और परिस्थिति की मार ने इन्हें लेखक बना दिया। इस दिशा में जब इन्होंने कोशिश की तो सफलता इन्हें मिलती गई और इन्होंने एक के बाद दूसरी तीसरी और चौथी पुस्तक ‘काँल गर्ल की चालाकी’ लिख ड़ाली। पहला उपन्यास ‘यह कैसी ज़िन्दगी’ दूसरा ‘बेवफ़ाई’ और तीसरा “अपना किसे कहें” है। वैसे श्याम यादव रहने वाले झारखंड के हैं पर क़िस्मत ने कुछ यूँ करवट बदली कि इन्हें कोलकाता आना पड़ा और ये अब यहीं के रहने वाले होकर रह गये हैं।