About The Bookचलो एक नये शहर चलते है एक काल्पनिक उपन्यास है और ये कहानी उन सभी लोगों के लिए जो कभी अपने सपनों को हकीकत बनाने की जद्दोजहद कर चुके हैं या फिर कर रहें है और ज़िंदगी के किसी मोड़ पर खड़े होकर एक नया रास्ता चुनने की हिम्मत रखते हैं ।यह एक आम सी लड़की नमिता की कहानी है झाँसी…एक छोटा सा शहर पर इतिहास की भारी विरासत लिए हुए । किले की ऊँची दीवारों से लेकर तंग गलियों तक हर कोना जैसे बीते वक़्त की कोई कहानी सुना रहा हो । शहर तो बड़ा नहीं था पर इतना छोटा भी नहीं कि सपनों को पनपने ही न दे । यहाँ की ज़िंदगी बड़ी सादी थी । न तेज़ रफ़्तार न बड़ी चमक बस एक ठहराव जिसमें लोग अपने सपनों को छोटे-छोटे पैमानों पर जीते थे।।नमिता झांसी की गलियों से निकलकर अपने सपनों की तलाश में दिल्ली का रुख करती है । यहाँ उसे नए लोग नई जगहें और नई चुनौतियाँ मिलती हैं कॉर्पोरेट दुनिया की भाग-दौड़ खुद को साबित करने का जुनून और रिश्तों के उतार-चढ़ाव के बीच नमिता धीरे-धीरे खुद को पहचानती है । इसी सफर में किसी अनजाने लेकिन खास से मुलाकात और मशीन बन चुकी ज़िंदगी को एक नया मोड़ मिलता है । ये बस नमिता की कहानी नहीं बल्कि उन सभी लोगों की कहानी है जो कभी अपने सपनों को हकीकत बनाने की जद्दोजहद कर चुके हैं या फिर कर रहें है और ज़िंदगी के किसी मोड़ पर खड़े होकर एक नया रास्ता चुनने की हिम्मत रखते हैं । ये कहानी पढ़ते हुए आप खुद को नमिता के साथ ही महसूस करेंगे – कभी मुस्कुराएँगे तो कभी नाराज होंगे कभी आंखे नम हो जायेंगी तो कभी गुस्सा भी आएगा । और इसे पढ़ते-पढ़ते शायद अपनी ही जिंदगी के कुछ पन्नों को दोबारा याद करने का फिर से मौका मिल जाए ।नमिता झांसी की गलियों से निकलकर अपने सपनों की तलाश में दिल्ली का रुख करती है । यहाँ उसे नए लोग नई जगहें और नई चुनौतियाँ मिलती हैं कॉर्पोरेट दुनिया की भाग-दौड़ खुद को साबित करने का जुनून और रिश्तों के उतार-चढ़ाव के बीच नमिता धीरे-धीरे खुद को पहचानती है । इसी सफर में किसी अनजाने लेकिन खास से मुलाकात और मशीन बन चुकी ज़िंदगी को एक नया मोड़ मिलता है । ये बस नमिता की कहानी नहीं बल्कि उन सभी लोगों की कहानी है जो कभी अपने सपनों को हकीकत बनाने की जद्दोजहद कर चुके हैं या फिर कर रहें है और ज़िंदगी के किसी मोड़ पर खड़े होकर एक नया रास्ता चुनने की हिम्मत रखते हैं । ये कहानी पढ़ते हुए आप खुद को नमिता के साथ ही महसूस करेंगे – कभी मुस्कुराएँगे तो कभी नाराज होंगे कभी आंखे नम हो जायेंगी तो कभी गुस्सा भी आएगा । और इसे पढ़ते-पढ़ते शायद अपनी ही जिंदगी के कुछ पन्नों को दोबारा याद करने का फिर से मौका मिल जाए ।