CHALO KI GHADI ABHI RUKI NAHIN (Poems)

About The Book

अनुपमा तिवाड़ी का यह तीसरा कविता संग्रह उनके कवि स्वर को और मुऽर करता हुआ आया है। उनकी कविता में स्त्री का दर्द नहीं बल्कि उस दर्द से निकलने का संघर्ष उभरकर सामने आता है। अनुपमा एक जुझारू स्त्री के सौंदर्य को अपनी हर कविता में प्रमुऽ रऽती हैं। इनको कविता में जो ताकत दिऽती है_ वह ओढ़ी हुई नहीं वरन प्रकृतिदत्त है। यह अनायास नहीं कि अनुपमा वृक्षों से भी टूट कर प्यार करती हैं। आिऽर स्त्री और वृक्ष में मूलभूत कोई फर्क नहीं है। अनुपमा की स्त्री बिल्कुल पेड़ की तरह उगती कटती और छाया देती है फल देती है और इस पृथ्वी को हरा रऽती है।
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.
downArrow

Details


LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE