उपन्यास 'चाँद हिंदुस्तान की धरती पर वास्तविकता से परे लेखक की काल्पनिक सोच है। कहानी का उद्देश्य एक तरफ देश ऊंची उड़ान की ओर अग्रसर तो दूसरी तरफ दो वक्त की रोटी के लिए संघर्षमय जीवन और भेद भाव को दर्शाता है दोनों के बीच की खाई को प्रेम प्रसंग के द्वारा पाटने का - काम किया गया है। कहानी के पात्र स्थान और घटनाएँ बिल्कुल असत्य है किसी भी जीवित या मृत्य व्यक्ति विशेष से इनका कोई संबंध नहीं है।