कश्मीर से कन्याकुमारी और अटक से कटक तक भारत के अनेक प्रांतों को चंद्रकांता ने अति निकटता से देखा है इसलिए अनेकता में एकता की सृजनात्मक शैली के लिए उनकी कहानियां अमूल्य बन पड़ी हैं। विभिन्न प्रांतों की जीवनशैली लोक रंगों और पंरपराओं की महक चंद्रकांता की कहानियों में मिलती है|