हिंदी में संसद के आचरण पर अच्छी कवितायें लिखनेवाले मेरी जानकारी में 2 लोग हुए हैं। एक तो धूमिल और दूसरे स्वयं प्रताप अनम। धूमिल एक समय में महत्वपूर्ण कवि थे।अब उनका समय गुजर चुका है।उस समय संसद की स्थिति आज की संसद से बेहतर थी।अनम की कविता में आज की संसद के आचरण की सभ्यता व्यक्त हुई है।अनम अपने नाम को सार्थक करते हैं।जो नमने वाला न हो। इसलिये वे अपनी बात बेबाकी से और निर्भीक होकर अपनी कविता में करते हैं।वे अपनी कविता सुबोध छंद में लिखते हैं जो सामान्य पाठकों के लिये भी बोधगम्य है या सुगम है। इसलिये उनकी कवितायें याद रहने की क्षमता से पूर्ण हैं।मतलब अनम की कविता लोगों की स्मृति में सदैव रहेगी। --डॉ०मैनेजर पाण्डेय
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