मेरी कविताओं में जो भी आस-पास घट रहा है उसका एक अलग ही आध्यात्मिक दृष्टिकोण आ जाता है। मानव संबंधों के कई रंग होते हैं। कुछ रंगों पर मेरी लेखनी चली है। प्रकृति में सजी हुई हर चीज है विलक्षण बशर्ते महसूस करना आता हो। मेरी कई कविताएं नदी पहाड़ चांद हरियाली आदि पर हैं वहीं अधिकतर कविताएं आध्यात्मिक अहसास पर खत्म होती हैं। पूर्व में महान कवियों ने जो कुछ लिखा है उस पर भी मेरी लेखनी की अपनी ही समीक्षाएं कविता बनकर निकल पड़ी हैं। अधिकतर कविताएं अतुकांत होकर भी जब बहने लगती हैं तो कई बार मैं भी नहीं जानती थी कि इस कविता का अंत क्या होगा। शब्द-दर-शब्द बढ़ती है कविता बिना किसी प्लॉट के मन के आयाम पर.... हर वो कुछ जो भी घट रहा है चला जा रहा है या चलाया जा रहा है मन पर अपनी छाप छोड़ता ही है। कभी-कभी तो ये छाप अमिट हो जाती है और कभी-कभी क्षण भंगुर । जो भी हो जीवन कागज पर उतारने में जो अनुभूति होती है वो ही 'चौथा आयाम' है। 'चौथा आयाम' कुछ ऐसा है जो जीवन में किसी को भी कहीं भी कुछ करने की प्रेरणा देता है।
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