यह शौर्य गाथा छत्तीसगढ़ की महान वीरांगना बिलासा देवी (माता) को समर्पित है। उन्होंने सदा अपने जीवन को शौर्य कर्तव्यनिष्ठा वीरता एवं स्वाभिमान से बिताया है तथा हमें भी इन भावों की शिक्षा प्रदान की है। उन्होंने एक कुशल पत्नी कुशल गृहिणी एक कुशल योद्धा एवं कुशल पुत्री का जीवन निर्वहन किया है जो इस आधुनिक समाज के लिए एक महान उदाहरण प्रस्तुत करता है।