बच्चों को उनके बचपन से वंचित कर उनके कंधों पर कार्य का बोझ डाल कर उनका शोषण कर उनके बचपन को श्रमिक के रूप में बदल देना एक समाज एवं देश के लिए बहुत बड़ा अभिशाप होगा। संविधान 1950 के 24 में अनुच्छेद के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे मजदूरी कारखाने में ढाबे पर घरेलू नौकर इत्यादि के रूप में कार्य करवाना बाल श्रम के अंतर्गत आता है। बाल श्रम हमारे देश और समाज के लिए बहुत ही गंभीर समस्या है। किसी बच्चे से उसका बचपन छीन लेना एक बहुत ही बड़े अपराध की श्रेणी में आता है। इसको खत्म करना हमारे देश एवं समाज के लिए एक चुनौती बन गया है।जीवन का सबसे अच्छा पल बचपन होता है जब हम बच्चे होते हैं तो हमें किसी भी बात की चिंता नहीं रहती है हम खेलते हैं सभी हमें प्यार करते हैं हम पढ़ते हैं लेकिन जिन बच्चों को बचपन से ही काम में लगा दिया जाता है वह कभी अपना मनचाहा काम नहीं कर सकते और उनका पूरा बचपन मजदूरी में ही व्यतीत होता है।