रामकथा के बाद डॉ- शर्मा महाभारत के कई प्रसंगों पर अपनी मौलिक उद्भावनाएं रखते हैं। उनका अध्ययन बहुत व्यापक है वे लोक जीवन की पड़ताल गहराई से करते हैं तो आधुनिक राजनीतिक परिदृश्य की विसंगतियों पर भी पूरी निर्मलता से प्रहार करते हैं। इन आलेखों से यह स्पष्ट हो जाता है कि वे मनुष्य जीवन को बेहतर बनाने के लिए आतुर हैं। ‘सुमनजी के साथ बीते क्षण’ रचना आत्मीय सौकाव्य के आस्वाद से भिगो देती है। कहने का तात्पर्य यह है कि यह कृति डॉ- शर्मा के बहुविधा अनुभवों के अनेक गवाक्ष खोलती है तथा उनके व्यापक अध्ययन का परिचय देती है।