सदा मिट्टी से जुड़े रहने वाले छत्तीसगढ़ के भीम चिंताराम छल-कपट-प्रपंचों से दूर एक प्रसन्नचित्त स्वच्छ एवं स्पष्ट छवि के धनी व्यक्ति थे जिन्होंने बिना भेद-भाव के अनेक आवश्यकमंदों की निःस्वार्थ सहायता की। उनका जन्म एक संपन्न परिवार में अवश्य हुआ था पर उन्होंने पुरुषार्थ से अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनके जीवन से सीख मिलती है कि व्यक्ति के पास इतना अधिक धन होना चाहिए कि वो अपने साथ-साथ औरों का भी विकास कर सके इतनी शक्ति होनी चाहिए कि अपने साथ दूसरों की भी सहायता कर सके व ऐसा व्यक्तित्व होना चाहिए कि लोग उससे प्रभावित होकर तन-मन-धन परिवार व दान-धर्म के महत्व को समझ सके ।
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