शतरंज के खिलाडी में एक तरफ नवाब वाजिद अली शाह अंग्रेजो द्वारा पकड़े जाते हैं और दूसरी ओर उनके शुभचिंतक मिर्जा सज्जाद अली और मीर रोशन अली खंडहर में बैठे शतरंज खेलते रहते हैं और शतरंजी बादशाह को बचाने की कोशिश करते हैं। आखिर शतरंज के वजीर की रक्षा के लिए एक दूसरे को मौत के घाट उतार देते हैं। यह कहानी उस इंसान की मानसिकता पर तीखा प्रहार है जिसे अपने से ही मतलब है|