यह कहानी आपको कई सौ बरस पहले ले जाती है जब इस धरा पर राजाओं महाराजाओं का राज हुआ करता था । साथ ही साथ यह आपको उस समय की याद कराती है जब समाज में ऊंच नीच की भावना चरम सीमा पर थी । ऐसे ही बख्त में सूरमा चुहरमल जो इस कहानी का नायक है का एक नीच कूल में जन्म होता है और वह उस समय के राजा रामजीत सिंह के गलत नीतियों के खिलाफ खडा होता है। यह संघर्ष तब और भी भयानक रूप ले लेती है जब राजा रामजीत सिंह की इकलौती पुत्री रेशमा और चुहरमल के बीच में प्रेम हो जाता है । यह कहानी एक सत्य घटना से चुरायी गयी है परंतु यह हमारी कल्पनाओं से भरी हुई है ।