जीवन के सफर में कई घटनाएं और पात्र हमारे मन को प्रभावित करते हैं। कथा और घटनाओं का ताना-बाना एक सामंजस्य के साथ जब हमारे समक्ष आते हैं तो बनता है कथा गुच्छ या कहानी संग्रह। चौखट पर स्त्री नारी समाज के विकास के साथ-साथ उनके शील और चरित्र की मर्यादा के संस्कारिक डोर से उन्हें बांधे रखता है जो अपनी मर्यादा की दहलीज या चौखट को लांघना नहीं चाहतीं। औरतों की मर्यादा भंग करना आधुनिकता का पर्याय नहीं होता। अगर यह किसी के लिए मानक रेखा है तो मुझे इससे परहेज़ है। ऐसी आधुनिकता मेरी दृष्टि में मर्यादाहीनता के अतिरिक्त कुछ नहीं।