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About The Book
Description
Author
शब्द किस प्रकार हमारे जीवन के खेत में हल चलाते हैं और हमें फसल के तौर पर क्या देते हैं यह संग्रह उस की एक जीवंत बानगी है। इस संग्रह में शामिल कविताएँ शब्दों में खुलने वाला चुप्पियों का वह गुप्त राग है जो पाठक की मन-वीणा को झंकृत कर देता है। स्वयं कवि के शब्दों में कहें तो –चुप्पियों के पथ पर चलते-चलते जो ध्वनियाँ गूँजती हैं वही तो अंतत: कविता व संस्कृति का सत्य है जिसे हम सब हर हाल में जी लेना चाहते हैं। इस संग्रह में शामिल कविताएँ समकालीन कविता व समाज संस्कृति और मानवीय संवेदनशीलता के विभिन्न मूल्यों का पता देती हैं। शब्द व संकेतों के सहारे विवेक कुमार मिश्र पाठकों को एक ऐसी अनथक यात्रा पर ले जाते हैं जिस में पाठक को पता चलता है कि अभी भी इस संसार में बहुत कुछ है जिसे वह परख नहीं पाया है। अगर आप के मन में एक ऐसा कविता-संग्रह पढ़ने का भाव हिलोरें ले रहा है जिस में समकालीन कविता समाज की प्रमुखताओं के साथ-साथ नवीन काव्य संवेदनाएँ लिए हों तो आप ‘चुप्पियों के पथ’ पर कवि के संग चल सकते हैं।