"सर्वाइवल फॉर ध फिटेस्ट" - डार्विन। हम डार्विन के इस सिद्धांत का अध्ययन कर चुके हैं और इसके उदाहरण पढ़ चुके हैं एवं सुन चुके हैं । अगर डायनासोर, मैमथ, आदि जैसे कई विशालकाय जानवर विकास से नहीं बच पाए हैं, तो साधारण आदमी क्या चीज़ है ? हर सौ साल में इस धरती पर एक महामारी फैली है, जिसने इंसान को खत्म करने की कोशिश की है। लेकिन अनुग्रह के देवताने मनुष्य को दो चीजें दी हैं जो उसे अन्य जीवित प्राणियों से अलग करती हैं। एक विकसित मन और दूसरा सहानुभूति रखके काम करनेवाला मन। २०२० में कोरोना वाइरस का कहर आया और दुनिया दहशत की स्थिति में आ गई। लॉकडाउन में गरीब और पैसेदार अपने ही ठिकाने पे रहे। लगभग सभी को छोटी-बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। लेकिन कई लोग गंभीर मुसीबत में थे। इस बार कुछ योद्धा मैदान में आए और परिस्थिति का हिम्मत से सामान किया। उन्होंने न केवल कोरोना के खिलाफ लड़ाई का समर्थन किया बल्कि मोर्चे पर लड़े । उन्होंने लोगों की सेवा की और कोरोना की महामारी में हिम्मत दिखाई। हम सभी ने अखबारों में, टीवी, सोशल मीडिया में कोरोना योद्धाओं की कहानियां पढ़ी और सुनीं । इन योद्धाओं की कहानी को एक प्रेरणास्त्रोत के रूप में तब्दील करने के लिए "नेक्षस प्रकाशन" ने सत्यकथा पर आधारित एक प्रतियोगिता का आयोजन किया । राष्ट्रिय स्तर पर काफी स्पर्धकोने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और कोरोना योद्धा की सत्यकथा को शब्द स्वरूप कहानीमे तब्दील किया। प्रत्येक कहानी कोरोना योद्धा के संघर्ष, मन की परिस्थिति का चित्रण और विशेष रूप से हम सभी को हिम्मत प्रेरित करती हैं । ऐसे कई लोग हैं जिनके कार्यों पर ध्यान नहीं दिया गया, उनमें से कई आदर्श लोगो की धटना को कहानि के रूप में चित्रित किया गया है और समाज के लिए एक नई आशा रखने की कोशिश की गई हैं । कोरोना योद्धाओं की कहानियों का यह संग्रह हर किसी को पसंद आएगा, यही उम्मीद है । कहानियों के इस संग्रह का अगली पीढ़ी को इंतजार रहेगा। में आशा रखताहू की हर माता-पिता, शिक्षक और शुभचिंतको हर छात्रों को इस कहानी संग्रह को उपहार के रूप में अदा करे अपनी युवा को एक प्रेरणादायक राह बताये की जो राष्ट्र के निर्माण को मजबूत करेगा । नेक्षस प्रकाशन और सभी लेखकों को बधाई। और उन सभी कोरोना योद्धाओं को प्रणाम जिन्होंने इस महामारी में आत्मविश्वास से काम किया । जय सरस्वती मा! जय हिंद! जय भारत!