सामाजिक विषयों को सस्पेंस के रंग में रंगने में उस्ताद विक्की आनंद का जवाब नहीं। उन्होंने भारतीय युवा वर्ग की रूचि को ध्यान में रखते हुए नब्बे के दशक में हिट जासूसी उपन्यास लिखे उस दौर में बुक स्टॉल पर उनके उपन्यासों की खूब मांग होती थी। पाठक उनके उपन्यास को एक ही बैठक में पूरा पढ़ना चाहते हैं।