इस संग्रह में ओड़िआ के बहुचर्चित कहानीकार नाटककार उपन्यासकार चित्रकार कवि और शोधकर्ता जगन्नाथ प्रसाद दास की हिंदी में अनूदित इक्कीस कहानियाँ हैं। इनमें से कुछ कहानियाँ समय-समय पर हिंदी की महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर चर्चा में रही हैं। मजे की बात तो यह है कि इनमें से हर कहानी कल्पना से कोसों दूर खड़ी दिखाई देती हैं। - संग्रह की कहानियों में हम अपने आस-पास के हर तबके के लोगों और उनकी रोजमर्रा की समस्याओं से रूबरू हो सकते हैं। श्री दास सामाजिक प्रसंगों और राजनीतिक समस्याओं को लेकर जितने सजग हैं विचारों की दुनिया में चल रहे आंदोलनों के प्रति भी उतने ही सचेत हैं। उनके अध्ययन और शोध का ज्ञान अनुभूति में रूपांतरित होकर उनकी कहानियों में शामिल हो जाता है। ये कहानियों उनके ज्ञान का प्रदर्शन न होकर आंतरिक अनुभूतियों का रूपायन हैं। ये कहानियाँ समसामयिक सामाजिक प्रसंगों आरक्षण सांप्रदायिक दंगों नारी संघर्ष एवं विश्व में मनुष्य की स्थिति को लेकर लिखी गई हैं। -- आशा है हिंदी में अनूदित इस नवीनतम कहानी संग्रह का स्वागत हिंदी के सुधी पाठक उसी आग्रह और उत्साह से करेंगे जैसा कि वे अब तक करते रहे हैं।