राहुल और अंजली अलग-अलग शहरों के 12th standard के स्टूडेंट्स हैं। 12th standard! लाइफ का वो टाइम जब career की नाव अपनी दिशा ढूँढने लगती है वहीं कइयों के दिल प्यार के हिचकोले खाना शुरू करने लगते हैं। साइकिल की उतरी चेन राहुल और अंजली को by chance पटना में मिलाती है। दोनों को ''प्यार-टाइप-का-कुछ''-सा होता है। फिर जहाँ higher career dreams अंजली को दिल्ली ले आती है वहीं परिवार की जरूरत राहुल को सेना में ले आती है। रातों-रात एक ''ब्वॉय'' ''जवान'' बन जाता है। जाँबाज सैनिक बन जाता है। सैनिक का जीवन वो किताब होता है जिसका हर पन्ना कहानी मे अलग मोड़ लाने की कूवत रखता है। एक सैनिक किसी ''राधा'' का बड़ा भाई भी होता है किसी ''अमित''''असलम'' का लंगोटिया यार भी होता है। किसी ''श्रीवास्तव जी'' के घर का बड़ा लड़का भी होता है और उस घर की इकलौती उम्मीद भी होता है। एक सैनिक शायद कम पढ़ा मगर अपने कॉलेज का मेधावी छात्र भी होता है। एक सैनिक विश्व-स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाला मिल्खा सिंह भी होता है। आज के जमाने का गांधी अन्ना हजारे भी होता है। एक सैनिक किसी ''अंजली'' का ''राहुल'' भी होता है। सैनिक-जीवन के बैकग्राउंड खूबियों चुनौतियों अवसरों साहस त्याग पारिवारिक जरूरतों और प्रेम-कहानी सहित विभिन्न आयामों से प्रेरित कहानी ‘साइकिल की चेन’ आम बोलचाल की भाषा-शैली में लिखी गई है। राहुल और अंजली के द्वारा प्यार को समझने और उसे पाने की जद्दोजहद भी इस कहानी का अहम हिस्सा है। हाल के वर्षों में हिंदी के कई bestsellers देने वाले हिंद-युग्म के द्वारा प्रकाशित किया जाना इस कहानी की ख़ूबसूरती और विश्वसनीयता में चार-चाँद लगाता है।.
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