एक वह समय था जब बच्चे नाना-नानी दादा-दादी के पास अक्सर जाया करते थे। खेल-खेल में वे जीवन के सुंदर मूल्यों को ग्रहण कर लिया करते थे। पर आज जब व्यस्तताएँ बढ़ती जा रही हैं ऐसे समय में ये कहानियाँ ही हैं जो हमें आनेवाली पीढ़ी के और निकट ला सकती हैं। रात को सोने से पहले के वे पल जब हम और हमारे लाडले साथ-साथ कहानियों का आनंद उठाते हैं अमूल्य होते हैं। इन्हीं पलों में अनजाने ही हमारे बीच का प्यार और प्रगाढ़ होता जाता है और बच्चे सीख जाते हैं जीवन का सबसे पहला मूल्य- संबंधों की मधुरता का मूल्य।<br>हर कहानी को एक छोटे बच्चे की आँखों से देखने की कोशिश की गई है। चाहा है कि हर कहानी को एक बच्चे के कानों से सुना जाए और एक बच्चे के मन से समझा जाए। कोशिश की गई है कि ऐसा कोई भी शब्द जो उनके कोमल मन को चुभे इन कहानियों के माध्यम से उनके कानों तक न पहुँचे। यहाँ प्रयास रहा है कि हर कहानी को एक सकारात्मक अंत मिले जिससे कि बच्चों के स्वप्नों को मिले एक सार्थक आरंभ।