प्रिय भगतों कुछ समय पहले माँ जगदम्बिका ने प्रेरणा दी कि 'दुर्गा सप्तशती' को हिंदी में प्रकाशित करो जो अपने आप में भी एक ग्रन्थ के रूप में है और एक ग्रन्थ की रचना साधारण मानव के वश की बात नहीं हो सकती। श्री दुर्गा सप्तशती पाठ संस्कृत में है और सभी को संस्कृत भाषा पढ़नी नहीं आती इसलिये इसका पाठ विद्वान ब्राह्मणों / पंडितों द्वारा किया जाता है। श्री दुर्गा सप्तशती पाठ को ब्राह्मणों / पंडितों के द्वारा चंडी यज्ञ के समय किया जाता है। ये सम्पूर्ण पाठ माँ आदिशक्ति जगदम्बा को अत्यधिक प्रिय है। माँ आदिशक्ति जगदम्बा भवानी ये चाहती हैं कि ये पाठ सभी भगत प्रेमपूर्वक श्रद्धा से खुद पढ़ा करें और माँ आदिशक्ति जगदम्बा को सुनाया करें। केवल नवरात्रि काल में ही नहीं अपितु हर रोज इसका जाप किया करें और अपनी सभी मनोकामनाएं पूरी करें । हे माँ! आपने इस पाठ को लिखने की प्रेरणा मुझको दी। मुझे इस लायक समझा मुझे चुना ये दर्शाता है कि आप मुझ पर अधिक स्नेह रखती हैं। मैं बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। वैसे तो मानव जन्म कर्मों के अनुसार मिलता है मिलना ही अनमोल है और उसमें भी कोई कारण होता है। जिन पर आपकी विशेष कृपा हो उनको आप चुनकर स्वयं अपना कार्य करवाती हैं। इस कार्य में आपकी प्रेरणा जब मुझको मिली तो रास्ते भी बनते गये। मैं जब लिखने बैठा तो गणेश जी ने सभी विघ्नों को हरना आरम्भ कर दिया। माँ सरस्वती जी ने खुद शब्दों को पिरोया और मैं लिखता चला गया। फिर इस पाठ को रमन द्विवेदी से पुनः लिखवाया। इसकी ऑडियो / वीडियो और पुस्तक तैयार है । आप इसको YOU TUBE CHANNEL PARA SHAKTI पर देख सकते हैं ।
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