कविता मेरे लिए मानव जीवन की विवशता को प्रकट करने का माध्यम है मेरी कविताएँ पूर्वजों की खेती की हरियाली से गुजरकर वर्तमान के बंजर होते खलिहानों की दास्ताँ है मैंने बचपन में किसानों का संघर्ष देखा है तिनका तिनका जोड़ कर बनाये घर कैसे शहरों में जाकर बस गये और भरे पूरे ओसारे आँगन शमशान खाली होते देख विस्थापन का दर्द मेरी लेखनी में आंसू बन बहता है मुझे वो स्त्री सबसे अधिक खुबसूरत लगी जिसके कपाल में स्थित कुमकुम श्रम की धार के साथ नदी बन जाता है.--सरिता सैल