‘ज़िंदगी के दुःख-सुख अपने और मेरेदो नदियों की तरह मिल जाने दो! और फिर जैसेपानी में लकीर नहीं पड़ती तुम्हारे-मेरे अस्तित्वमें भी कोई लकीर न खींची जा सके।’― अमृता प्रीतमइस संकलन में अमृता प्रीतम के प्रेम पत्र संकलित किए गए हैं। ये प्रेमपंत्र केवल प्रेम की पींगे ही नहीं हैं वरन इनमें समाज काल और संस्कार भी रेखांकित किए गए हैं। युवा पीढ़ी के लिए प्रेरक भी और मार्गदर्शक भी हो सकती है यह पुस्तक। साहित्य जगत में इन पत्रों का बेहद उच्च स्थान है।