‘दौरान-ए-तफ़तीश' एक आई.पी.एस. अफ़सर की ज़िंदगी का रोज़नामचा कही जा सकती है जिसे अपने कार्यकाल के दौरान तरह-तरह की छोटी-बड़ी परेशानियों से जूझना पड़ता है। लेखक सतीश दत्त पांडेय ने अनेक गैर मामूली घटनाओं को खुले नज़रिए से देखा-परखा है। पुलिस अधिकारी की जिंदगी की रोज़मर्रा की समस्याओं प्रशिक्षण जांच थर्ड डिग्री झूठे सबूत-गवाही भ्रष्टाचार राजनीतिक हस्तक्षेप-आदि को इस किताब में पूरी ईमानदारी के साथ जगह दी गई है। सतीश दत्त पांडेय के इन संस्मरणों में उनके सेवाकाल के अनेक असाधारण अनुभवों और मार्मिक अनुभूतियों का सार अंकित है।