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About The Book
Description
Author
एक कवि को मौसमों से बहुत लगाव होता है और कवि अक्सर कहते हैं कि मौसम स्वयं एक कविता है। इसी कथन को चरितार्थ करता है विक्रम गथानिया का कविता संग्रह – दिसम्बर की सुबह। इस संग्रह में शामिल कविताएँ प्रेम और संवेदना की चालू बढ़त से इतर की कविताएँ हैं। इस संग्रह की कविताएँ प्रकृति के सुकोमल चित्रण ऋतुओं के मनभावन विवरण की बानगी हैं।विक्रम की कविताएँ पाठकों के मन में उस जगह पहुँचती हैं जहाँ पर दु:ख का चोर छिपा बैठा है। स्त्री-विमर्श के साथ-साथ प्रेम की नवीन दृष्टि पर आधारित कविताएँ भी संग्रह में मौजूद हैं।कवि लाल्टू से शब्द- “शमशेरकीदूबपुकारतीहै” उधार ले कर कहें तो आप के भीतर के सुकोमल मनुष्य से मिलन के लिए ‘दिसम्बर की सुबह’ आपको पुकारती है।एक कविता-पाठक के तौर पर अगर आप प्रेम वर्षा संवेदना प्रकृति और मानवीय संबंधों पर रची गई कुछ नवीन चेष्टाओं वाली कविताएँ पढ़ना चाहते हैं तो आप की बुक शेल्फ़ में यह संग्रह का मौजूद होना सोने पर सुहागा होगा।