इस उपन्या स की पटकथा ग्रा मीण क्षेत्र के उस परिवेश पर आधारित है-जि समें मैंने अपना बचपन जि या है- इसीलिए मैंने इसमें सच्चा ई के साथ वो लिखने का प्रयास कि या है जो मैंने सचमुच में जि या है। इस कहानी को लिखते समय मेरा समस्त ध्या न इस बात पर केन्द् रित था कि ग्रा मीण आंचल के जीवन में झांक कर आपको भी बताया जाए- कि इसमें क्या क्या है। ग्रा मीण जीवन को बाहर से झांका और अंदर से जीना कि तना खूबसूरूर त होता है ग्रा म्य जीवन क्या होता है इसकी मि ठास क्या होती है इससे में अपने पाठकों को अवगत करवाना चाहता हूं ताकि वे भी इस उपन्या स को पढ़ते हुए अपने बीते दिनों को याद कर सकें और कुछ क्षण ों के लिए उन बीते पलों को ताजा कर जी सकें।