इस संग्रह में अधिकतर कविताएं 2019 से 2023 तक लिखी गई हैं। सदी के ये वर्ष वैश्विक और मेरे व्यक्तिगत सन्दर्भ में बेहद कठिन रहे हैं। अनजाने रोग भय पीड़ा और युद्ध सभी का एक-एक करके आक्रमण होता रहा। करोना का प्रकोप सदी का सबसे बड़ा विलापमय अध्याय रहा जिसमें मौत के ताण्डव के साथ पलायन का मार्च शवों का लावारिश पड़े रहना श्वान गान के साथ-साथ मानवता का अस्पष्ट स्पर्श भी था। इसके उपरान्त अफगानिस्तान में तख्ता पलट जहाँ मात्र क्रन्दन था। वक्त बीता ही नहीं था कि उक्रेन में युद्ध की त्रासदी की खबरें आनी शुरू हो गई। विश्व शान्ति अभी भी दूर है क्योंकि इजराइल फिलिस्तान के युद्ध में मृत्यु का ताण्डव बन्द नहीं हुआ। व्यक्तिगत फ्रन्ट पर देह का कण-कण खिरना जारी रहा स्लिप डिस्क तो करोनाकाल से पूर्व ही परेशान कर रही थी लेकिन इस काल में आरंभ हुई अन्य समस्याएं जैसे ब्लडप्रेशर कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना हरपीज का देह पर उतरना और अन्त में ब्लेडर में कैंसर कोशिकाओं का उपद्रव। निस्संदेह रोग से अधिक तकलीफ दायक होता है रोग का निदान कीमो की भीषणता और रेडियेशन की जलन को सहने में एक पूरा वर्ष चला गया। रोग से छुटकारा फिर भी न मिला तो मेहन भेदन यानी कि इंजेक्शनों ने नर्क का दरवाजा दिखलाने वाले दर्द से परिचय करवाया। -रति सक्सेना