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About The Book
Description
Author
पुस्तक मानव जीवन को बाधा मुक्त होकर स्वीकारने की समझ प्रदान करती है। स्वयं को समझने सुनने व प्राप्त करने की ओर प्रयास करती है। हृदय की पुकार सुनती हुई उलझे मन की गुत्थियॉं सुलझाती जाती है। सरल भाषा शैली से सुशोभित बंजर मन और जीवन पर कलम रूपी हल चलाते हुए ज्ञान रूपी जल से सिंचित करती जाती है जिससे भीतर दबे विशुद्ध भाव स्वरूप बीजों के अंकुरण की संभावना का जन्म होता है। पुस्तक हमें सच्चे प्रेम के भाव को बड़ी सहजता से दर्शाती है अपने जी की कब कहॉं सुनी कब मुड़ देखी अपनी ओरी ये लोग बाग मुस्काए रहें बस इतनी सोच रही थोड़ी कब कौन कहॉं तक साथ रहा कब किया सभी उपयोगी था कब बंधन मुक्ति प्रदान किए कब मन धोया जो भोगी था इक बार नजर भर देखो तो अपने भीतर के जीवन को बिसरा जो जन्मों जन्मों का मिल पाए क्या प्यारे जन को