संविधान की शपथ लेने वाले पहले प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ब्राह्मण थे तथा संविधान के रचनाकार एक छोटी जाति से थे। परन्तु इनके द्वारा देश को समर्पित सर्वश्रेष्ठ संविधान की शपथ लेने वाले सभी राजनीतिक हस्तियों ने दिल से अपने कर्तव्यों का पालन किया है और भारतवर्ष को अति-पिछडे देशों की श्रेणी से निकाल कर बड़े विकसित देशों की श्रेणी में शामिल कर दिया है। इसलिये भारतीय संविधान जन कल्याणकारी है तथा देश के लिए वरदान है। देश के प्रगति पथ पर लाने के लिए सर्वजन तथा दबे-कुचले दलित पिछडे लोगों को शिक्षा प्राप्ति के लिए संविधान द्वारा शिक्षा के लिए आरक्षण का प्रावधान भी किया गया तथा विशेष आर्थिक सहायता दी गई जिससे इस वर्ग का जीर्णोद्धार हो गया और इन्हें सरकारी कार्यालयों में द्वितीय श्रेणी की नौकरी भी मिलने लगी।