पुस्तक में धन सम्पत्ति तथा आय प्रवाह से जुड़ी बातों को समेटा गया है और यह बताया गया है कि धन एवं आय प्रवाह का क्या महत्व है। व्यक्ति की आय व्यय बचत के साथ मानवीय व्यवहार सम्बंध की प्रगाढ़ता को प्रभावित करता है। यह आज के समय से पूर्व की स्थितियों की तुलनात्मक बेहतरी को इंगित करता है तथा पूर्ववर्ती आय-व्यय बचत निवेश के विविध आयामों को भी एक धुरी पर रखने की कोशिश करता है। व्यक्ति को निम्न आय या शून्य स्तर से आगे बढ़ने के लिए कई प्रयास करने पड़ते हैं और जीवन को आर्थिक सामाजिक तथा मानसिक रुप से बेहतर बनाना होता है। व्यक्ति की आर्थिक परिस्थिति उस परिप्रेक्ष्य को भी बतलाती है जहाँ व्यक्ति धन सम्पत्ति तथा आय के साथ सुख शांति व उन्नति को व्यवहार में ला पाता है। इस पुस्तक में धन का अर्जन व बचत-निवेश क्यों जरुरी है धनार्जन कैसे हो सकता है वित्तीय अनुशासन तथा अच्छी आदतें भी धन के लिए जरुरी हैं - इनकी भी चर्चा की गई है। आज धन सम्पत्ति व आय प्रवाह का महत्व निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। आज लोग भौतिकता को अधिक बल देने लगे हैं और वे आत्म गौरव के लिए दीनहीन दिखना पसंद नहीं करते। धन ज्ञान में व्यक्ति अपनी समझ व निवेश की परिधि में स्वयं को अमीर बनाने की दिशा में कौन-से कार्य कर सकता है कैसे कर सकता है क्यों आय अर्जन बेहतर होना चाहिए इनका विस्तृत विवरण है।