धर्म और राजनीती :उनके शब्द निपट जादू हैं'' अमृता प्रीतम श्भारत ने अब तक जितने विचारक पैदा किये हैं वे उनमें सबसे मौलिक सबसे उर्वर सबसे स्पष्ट और सर्वाधिक सृजनशील विचारक थे। उनके जैसा कोई व्यक्ति हम सदियों तक न देख पाएंगे। ओशो के जाने से भारत ने अपने महानतम सपूतों में से एक खो दिया है। विश्वभर में जो भी खुले दिमाग वाले लोग हैं वे भारत की इस हानि के भागीदार होंगे। -खुशवंत सिंह सुविख्यात पत्रकार एवं लेखक|।ध्यान दर्शन :गोरख-वाणी पर ओशो द्वारा दिए गए प्रवचनों का संकलन है- जीवन संगीत। इसमें ओशो कहते हैं’ मैं तुम्हें संगीत देना चाहता हूं। लेकिन मैं जानता हूं तुम्हारी अड़चन। तुम्हें उदास चित्त लोगों ने बहुत प्रभावित किया है। सदियों से धर्म के नाम पर तुम्हें जीवन का निषेध सिखाया गया है जीवन का विरोध सिखाया गया है। मैं तुम्हें विकास से मुक्त करना चाहता हूं। मैं कहता हूं यह क्षणभंगुर भी उस शाश्वत की ही लीला है यह उसका ही रास है। वही नाच रहा है इसके मध्य में। नाच में सम्मिलित हो जाओ। नाच में सम्मिलत होते-होते ही वह आंख भी खुलेगी जिससे तुम्हें वह दिखाई पड़ने लगेगा।