Dharmantaran Ki Rajaniti Aur Aadivasi Samaj  (‘Kala Padari’ Upanyas Ke Vishesh Sandarbh Mein)

About The Book

भारत का धर्मनिरपेक्ष संविधान सभी धर्म के लोगों को शांति और खुशीपूर्वक जीवन जीने देने का हिमायती है. भारत में प्रारंभ से हिन्दू धर्म की सबसे मजबूत स्थिति रही है । इसे वैदिक धर्म और सनातन धर्म के नाम से भी जाना जाता है । कालान्तर में हिन्दू धर्म में सुधार की भावना से बौद्ध जैन और सिख धर्मों का उदय हुआ लेकिन इन धर्मों का मूल हिन्दू धर्म से ही जुड़ा रहा । बाद में यहां पारसी इस्लाम और ईसाई धर्मों का आगमन हुआ । ये धर्म हिन्दू धर्म से नितांत भिन्न थे । हिन्दू धर्म के साथ इन धर्मों के संघर्ष और समन्वय की प्रक्रिया शुरू हुई । इन प्रक्रियाओं के कारण ही हमारी सभ्यता के मूल तत्वों का निर्माण हुआ । यह प्रक्रिया अभी भी जारी है । 'धर्मांतरण' इसी प्रक्रिया का बाइप्रोडक्ट है । हमारे समाज में 'धर्मांतरण' एक समस्या के रूप में मौजूद है । चूंकि समाज में समस्या है तो इस पर राजनीति भी होगी । यह पुस्तक 'धर्मांतरण' के संदर्भ में हो रही राजनीति को समझने का एक प्रयास है । तेजिंदर का उपन्यास 'काला पादरी' 2000 ई. में प्रकाशित हुआ था । इस उपन्यास में 'धर्मांतरण' की समस्या और उसके सन्दर्भ में हो रही राजनीति का यथार्थ चित्रण किया गया है । यह उपन्यास मध्यप्रदेश के सरगुजा क्षेत्र के अभावग्रस्त आदिवासियों की पीड़ा और जरूरतों का लाभ उठाकर ईसाई मिशनरियों द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण एवं ‘घर वापसी’ के बीच झूलते आदिवासी समाज का मार्मिक विश्लेषण करता है । प्रस्तुत पुस्तक 'काला पादरी' उपन्यास के सन्दर्भ में आदिवासियों के धर्मांतरण को परखने का एक प्रयास है । गंभीर विमर्श के बावजूद भाषा सहज और शैली प्रवाहपूर्ण है । पुस्तक के माध्यम से धर्मांतरण की राजनीति से जुड़े बहुत सारे सवालों के जवाब लेखक ने कुशलतापूर्वक दिए हैं और जो छूट गए हैं उनके जवाब पाठकों को स्वविवेक से स्वयं तलाशने होंगे ।
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