‘धूप चाँदनी और स्याह रंग’ एक अनूठा कविता-संग्रह है जिसमें अलग-अलग विषयों पर लिखी गई कविताएँ मूलतः अपने परिवेश में स्वयं की सार्थकता की तलाश करती हैं। कविताओं में भी कहानी होती है। शब्दों और वाक्यों के पीछे से चुपचाप झाँकती कई-कई कहानियाँ जो आहिस्ता-आहिस्ता खुलती-निखरती जाती हैं। ‘धूप चाँदनी और स्याह रंग’ में कई ऐसी कविताएँ संकलित हैं जो ऐसी ही विशिष्ट अनुभूति देती है। ‘‘पक्षियों के भटकाव में है पेड़ का गिरना फिर-फिर उजड़ना फिर-फिर बसना उजड़ती ज़िंदगी का दर्द भी रहता है क्या महफ़ूज़ कहींकिसी क्लाउड पर अपलोड होकर!” -इसी संग्रह से