यह पुस्तक प्रसिद्ध शायर कुलदीप सलिल की चुनी हुई ग़ज़लों क़तों और शेरों का खास संकलन है। कहीं कोमल कहीं रूह को छू लेने वाली उनकी ये रचनाएँ पाठक को रसलीन कर देती हैं। ज़िंदगी का कोई कोना ऐसा नहीं जो शायर की नज़र से ओझल रह गया हो। एक ओर वे पाठक को रूमानियत से सराबोर कर देते हैं तो सामाजिक विसंगतियों पर व्यंग्य करने से भी नहीं चूकते।