समाज में दिनोंदिन तेजी से बढ़ती जा रही अमानवीयता असंवेदनशीलता और पाशविकता की घटनाओं को देख सुन पढ़ते लेखक का मन व्यथित हो उठा। इसी पीड़ा ने पुस्तक- '' ढूँढ़ते रह जाओगे इंसानियत'' को इस प्रश्न के साथ जन्म दिया कि क्या दुनिया से मानवता या इंसानियत खत्म हो जायेगी? और क्या हम इंसानियत को ढूँढ़ते ही रह जायेंगे? यदि ऐसा होता है तो फिर बिना इंसानियत के इंसान कहाँ बचेगा?मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में प्रोफेसर एवं प्राचार्य के रूप में सेवा दे चुके डॉ. एच. एल. माहेश्वरी ने 42 वर्षों तक स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थियों को अध्यापन कराया। साथ ही आपके निर्देशन में कई छात्र - छात्राओं ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकेडॉ. एच.एल. माहेश्वरी लेख और शोधपत्र प्रकाशित हुए हैं।