मेरा संदेश है : संसार को इतना प्रेम करो कि संसार में परमात्मा को पा सको। कहीं और कोई परमात्मा नहीं है। अपने को अंगीकार करो। अपने को अस्वीकार मत करो। तुम जैसे हो भले हो। उसके हस्ताक्षर तुम्हारे ऊपर हैं। तुम उसकी निर्मिति हो।<br>इसलिए जीवन का परम स्वीकार है मेरा संदेश।