ध्यान-सूत्रमहाबलेश्वर के प्राकृतिक वातावरण में ओशो द्वारा संचालित ध्यान शिविर के दौरान हुए प्रवचनों व प्रायोगिक ध्यान प्रयोगों का संकलन है यह पुस्तक। शरीर विचारों और भावों की एक-एक परत से ग्रंथियों को विलीन करने की कला समझते हुए ओशो हमें समग्र स्वास्थ्य और संतुलन की ओर लिए चलते हैं।पुस्तक के कुछ अन्य विषय-बिन्दुः• सेक्स उर्जा का सृजनात्मक उपयोग कैसे करें?• क्रोध् क्या है? क्या है उसकी शक्ति?• अहंकार को किस शक्ति में बदलें?• वैज्ञानिक युग में अध्यात्म का क्या स्थान है?मैं मृत्यु सिखाता हूंसमाधि में साधक मरता है स्वयं और चूंकि वह स्वयं मृत्यु में प्रवेश करता है वह जान लेता है इस सत्य को कि मैं हूं अलग शरीर है अलग। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग मृत्यु समाप्त हो गई। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग और जीवन का अनुभव शुरू हो गया। मृत्यु की समाप्ति और जीवन का अनुभव एक ही सीमा पर होते हैं एक ही साथ होते हैं। जीवन को जाना कि मृत्यु गई मृत्यु को जाना कि जीवन हुआ। अगर ठीक से समझें तो ये एक ही चीज को कहने के दो ढंग हैं। ये एक ही दिशा में इंगित करने वाले दो इशारे हैं।-ओशोमृत्यु से अमृत की ओर ले चलने वाली इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:* मृत्यु और मृत्यु-पार के रहस्य* सजग मृत्यु के प्रयोग* निद्रा स्वप्न सम्मोहन व मूर्च्छा के पार - जागृति* सूक्ष्म शरीर ध्यान व तंत्र-साधना के गुप्त आयामअनुक्रम1: ध्याआयोजित मृत्यु अर्थात न और समाधि के प्रायोगिक रहस्य2: आध्यात्मिक विश्व आंदोलन-ताकि कुछ व्यक्ति प्रबुद्ध हो सकें3: जीवन के मंदिर में द्वार है मृत्यु का4: सजग मृत्यु और जाति-स्मरण के रहस्यों में प्रवेश5: स्व है द्वार-सर्व का6: निद्रा स्वप्न सम्मोहन और मूर्च्छा से जागृति की ओर7: मूर्च्छा में मृत्यु है और जागृति में जीवन8: विचार नहीं वरन् मृत्यु के तथ्य का दर्शन9: मैं मृत्यु सिखाता हूं10: अंधकार से आलोक और मूर्च्छा से परम जागरण की ओर11: संकल्पवान-हो जाता है आत्मवान12: नाटकीय जीवन के प्रति साक्षी चेतना का जागरण13: सूक्ष्म शरीर ध्यान-साधना एवं तंत्र-साधना के कुछ गुप्त आयाम14: धर्म की महायात्रा में स्वयं को दांव पर लगाने का साहस15: संकल्प से साक्षी और साक्षी से आगे तथाता की परम उपलब्धि