चूँकि दीप्ति ने परास्नातक की उपाधि हिन्दी विषय के बाद संगीत में प्राप्त की इसीलिये इनके गद्य एवं पद्म में थिरकती हुयी अनवरत लयबद्धता स्पष्ट दिखायी देती है। इनके काव्य एवं प्रस्तुतीकरण से प्रभावित होकर आकाशवाणी झाँसी में “बुन्देलखण्ड की उभरती कवियत्री के उपमान से वार्ता एवं कविताओं का प्रसारण किया।<br>''दिल दरिया है'' प्रथम सर्जना-संग्रह सुविज्ञ पाठकों के मध्य अपना स्थान अवश्य प्राप्त करेगा इस मंगल कामना के साथ।