दिल..कहने के लिए तो ये हमारे शरीर का एक हिस्सा हैं पर न जाने कितने ऐसे अनगिनत ख़यालात हैं जो रोज हमारे दिल में आते रहते हैं उनमें से कुछ हम याद रख पाते हैं तो कुछ भूल जाते हैं कुछ बयाँ कर पाते हैं तो कुछ दिल में ही दबे रह जाते है। कभी कभी उन दबी हुई बातों को दिल से निकालना ज़रूरी हो जाता हैं चाहें वो लिख के हो या बोल के। हर किसी के पास व्यक्त होने की कला नहीं होती कुछ अपने जज़्बात अपने दिल की क़लम के जरिये कागज़ पर उतारते हैं। हमारी अगली प्रस्तुति दिल की कलम से इसी से इंतेफाक़ रखती हैं। इस संकलन में विभिन्न शहरों के लेखकों ने एकत्रित आकर अपने दिल में आने वाले विचारों को क़लम के माध्यम से प्रकट किया हैं।