किसी कवि के निर्माण के लिए उसकी कविता ही महत्वपूर्ण साबित होती है.. कविता में परिवर्तन अपने युग के अनुसार होता चला गया और हम यह मानते हैं के हिंदी कविता को अज्ञेय नागार्जुन मुक्तिबोध रघुवीर सहाय आदि कवियों ने नई कविता की धारा को नई दिशा दी. तब से लेकर आज तक कविता अपने प्रवाह से अनवरत अपने स्वरूप को अभिव्यक्त करती चली आ रही है... कवयित्री डॉ मंजुला शर्मा नौटियाल जी ने सृजन की आत्मा से उसके सौंदर्य कोकविता के माध्यम से निखार दिया... व्यक्ति के मन के अंदर इतना सैलाब होता है जो भावों के माध्यम से परिस्थितियों के अनुसार वह कविता के रूप में अभिव्यक्त होता है. कवयित्री ने अपने संग्रह में अपने भाव विचार घटनाएं आदि का चित्रण खूबसूरती के साथ व्यक्त किया है कवयित्री ने अपने अनुभव के आधार पर अपनी अनुभूति को भावनाओं के माध्यम से काव्य रूप में इतने सुगठित तरीके से प्रस्तुत किया है जो सराहनीय है.