यह पुस्तक कुण्डलिनी द्वारा अद्भुत सिद्धि प्राप्त कर असाध्य कार्य सरल बनाने का मार्ग प्रशस्त करने में सक्षम है। भगवान राम को गुरु वशिष्ठ ने 7 वर्ष की आयु में शक्ति प्रदान की थी जिसके द्वारा उनकी कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत हुई और वे विलक्षण शक्तियों के स्वामी बने। यह प्रथा गोपनीय रूप से भारत में प्रचलित रही है। स्वामी रवीन्द्रानन्द ने इस परम्परा को आगे बढ़ाया है। इसका लाभ जन-सामान्य उठा सके इसलिए इस पुस्तक की रचना की गई। तो आइये पढ़े कुण्डलिनी की जागरण की गोपनीय जानकारी और शक्ति जागरण से अपने भौतिक मानसिक और त व्यक्तित्व को निखारें।