कहानी का सीधा सरोकार हमारे लिए हमारे जेहतर बनाने को लिए और हमारी संवेदनाको जाृत करने के लिए होना चाहिए. सभी अपने जीवन स्तर को ऊंचा उठाना चाहते हैंऔर इसके लिए प्रयास भी करते हैं लेकिन इस आर्थिक युग में हम अपनी आत्मा कीआवाज नहीं सुन पाते हैं और मानवता को ताक पर रखकर आगे बढ़ने की कोशिश करतेहैं. एक सार्थक रचना पाठक की तीसरी आआख होती है जो सावधान करती है. अगररचनाकार की रचनाएए ऐसा कर पाती है को को सार्थक समझी जानी चाहिए. लेखकको इससे अधिक और कुछ चाहिए भी नही पाठक को सार्थक मानसिक ऊर्जा अपनलेखने से प्रदान करने में मै कितना समर्थ हो पाया हू इसका निर्णय हारे पाठक ही करेंगे.