भारत में सदियों से किसी न किसी युगपुरुष के जन्म लेने की परम्परा चली आ रही है। इन महापुरुषों की श्रृंखला में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। एक शिक्षक होने के बाद भी संपूर्ण विश्व पर प्रभुत्व संपूर्ण विश्व पर प्रभुत्व होने के बाद भी एक शिक्षक शायद यही उनकी पहचान थी। जीवन के अनगिनत उतार-चढ़ावों को झलते हुए डॉ. राधाकृष्णन निरंतर आगे बढ़ते गए। ऐसे महापुरुष के विराट व्यक्तित्व को पुस्तक रूप में समेटना असंभव कार्य है। फिर भी लेखक ने उनके संपूर्ण जीवन की आभा को पुस्तक में समेटने का विलक्षण एवं सराहनीय प्रयास किया है। अवश्य ही यह पुस्तक पाठकों की प्रेरणा स्रोत बनकर उनका मार्गदर्शन करेगी।