दुनिया का सबसे अनमोल रतन प्रेमचंद की पहली कहानी थी। इसमें दिलफरेब दिलफिगार से कहती है कि- अगर तू मेरा सच्चा प्रेमी है तो जा दुनिया की सबसे अनमोल चीज लेकर मेरे दरबार में आ। उसे पहला रतन फाँसी पर चढ़ने वाले काले चोर की आँखों से टपका हुआ आँसू मिला किंतु दिलफरेब ने वह स्वीकार नहीं किया। वह दूसरा रतन प्रेमी तथा प्रेमिका की चिता की मुट्ठीभर राख लेकर दिलफरेब के दरबार में गया किंतु वह भी सबसे अनमोल रतन नहीं माना गया। खून का वह आखिरी कतरा जो वतन की हिफाजत में गिरे दुनिया का सबसे अनमोल रतन माना गया। इस कहानी में प्रेमचंद का देशप्रेम साफ झलकता है।
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