यह तो नुमैरलॉजी व ब्रह्मांडीय चेतना विज्ञान के आधार पर विकसित की गई अवधारणा है। जो आप इस पुस्तक के स्वाध्याय के साथ ही जान पाएंगे। यह पुस्तक पूरे विश्व के उन सभी विद्यार्थियों को समर्पित है जो पढ़ाई व सीखने के साथ-साथ कमाना भी चाहते हैं। उन सभी लोगों को भी समर्पित है जो कमाने के साथ - साथ सीखना भी चाहते हैं यानि उन सभी को समर्पित है जो जीवनभर सीखने की चाहत रहते हैं। यह पुस्तक उन सभी लोगों को समर्पित है जो मानते हैं कि पैसा ही सब कुछ नहीं है मगर पैसा बहुत कुछ है। अतः केवल पैसा ही धन-दौलत संपदा व संपत्ति नहीं होता बल्कि असली धन-दौलत संपदा व संपत्तियाँ तो आपके विचार हैं आपका विवेक है और ये सब आध्यात्मिक समतुल्यों व मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया द्वारा अस्तित्व के संयोग व स्वयं द्वारा पैदा किए जा सकते हैं। फिर इनके द्वारा पैसा-दौलत सोहरत व भौतिक संसाधन भी जुटाए जा सकते हैं। एक बार पुनः कह रहा हूँ कि पैसों से अधिक महत्वपूर्ण भी कुछ संपत्ति व सम्पदाएं हैं...पुस्तक समर्पित हैं।