अंग्रेजी भाषा एक समृद्ध भाषा है जिसका अंतर्राष्ट्रीय विस्तार है। विश्व के प्रायः समस्त वाङ्मय का ज्ञान इस भाषा के ज्ञान से सुलभ हो सकता है। अतः भले ही अंग्रेजी भाषा राष्ट्रभाषा न हो समाज और व्यक्ति के विकास के लिए इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है। विकासोन्मुख भारत के लिए इस भाषा का ज्ञान अनिवार्य-सा है। यह पुस्तक उनके लिए उपयोगी है जो अंग्रेजी भाषा सीखना चाहते हैं। व्याकरण का दुर्गम जाल बहुधा भाषा-शिशिक्षु-विद्यार्थी को हतोत्साहित कर देता है। अतः दुर्बोधता को घटाने के लिए दोनों भाषाओं की पारस्परिक प्रवृत्तियों के आधार पर व्यावहारिक नियम दिये गये हैं। यह विश्वास है कि इनकी जानकारी हो जाने के बाद विद्यार्थी को अंग्रेजी भाषा की व्याकरण-विषयक जटिल पुस्तकों का भी अवबोध अवश्य सुगम हो जाएगा।