फ़र्ज़ कीजिये के एक दिन आप के हाथों एक ऐसी किताब लगजए जिस में आपके हर सवाल का जवाब मौजूद हो। ‘एहसास-ओ-ख्यालात’ शायद ऐसी ही एक छोटी सी किताब है। इस किताब में ना नज़्म है ना शेर है ना क़सीदे हैं। इस किताब में सिर्फ और सिर्फ कुछ ख़याल हैं वो ख़याल जो अक्सर लोगों के हुवा करते हैं। और उन ख़यालों से पनपते कुछ सवाल और उन सवालों के कुछ पुरे और कुछ अधूरे जवाब हैं।