यह किताब लेखिका की कल्पनाशीलता और यथार्थ का मेल है। किताब में जितनी भी कविताएँ हैं उनका सार अथाह ऊर्जावान सकारात्मक दृष्टिकोण है। मनुष्य में ऊर्जा की कमी नहीं है बस सही दिशानिर्देशअपनापन और खुद पर अटल विश्वास की आवश्यकता है। अपनी परम्परा और संस्कृति से उनको जोड़े रखने का प्रयास मात्र है। मनोरंजन के साथ-साथ सकारात्मक सोचसमाज के दृष्टिकोण को अभिव्यक्त करने का प्रयास मात्र है। सभी कविताओं में एकता- अखंडता अपनापन संवेदना-संस्कार को आधार मानकर समाज को और खासकर जातिवाद रंगभेद से ऊपर उठकर सौहार्दपूर्ण वातावरण का सृजन करना ही उद्देश्य है। मीरा सजवान 'मानवी'