‘एक अंजुरी प्रेम' प्रगाढ़ प्रेम से ओतप्रोत सामाजिक संबंधों की कल्पना है जिसमें यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि परिवार से लेकर समाज तक आत्मीय संबद्धता के लिए थोड़ा सा ही प्रेम पर्याप्त होता है क्योंकि सहज भाव से माथे पर टीका लगाना भी कितनी सुंदर अनुभूति देता है। कविताएं रिश्तों के आधार प्रेम को तो व्यक्त करती ही हैं साथ ही साथ परंपराओं रीतियों यहां तक कि नित्य के पूजन संकल्पों में रची बसी विधियों का भी अत्यंत सुंदर चित्रण करती हैं। 'एक अंजुरी प्रेम' साधारण प्रेम गीतों से बढ़कर त्याग बोध और निःस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है। यह जनमानस के संपूर्ण रिश्तों को सहेजने का एक तरीका है जिसमें मित्रता के भाव इतने ऊंचे हैं कि उसे मोह पाकर त्याग देना उचित लगता है वियोग का दुख मनाने की अपेक्षा चिंतन मनन और आत्म विस्तार उचित लगता है। संपूर्ण जीवन में एक ऐसे भाव का आलिंगन ही मनुष्य के प्रेम को शाश्वत बना सकता है जिसके होने से वह निःछल और सरल हो जाता है। ऐसे ही साधारण जीवन शैली में बसे आध्यात्मिक और सांसारिक जीवन के सुंदर समागम की छवि है “एक अंजुरी प्रेम”।Ashvani Singh